10.8.17

Top 5 Eye Diseases And Treatment In Hindi | आंखों के 5 विकार व उनके समाधान

आंखों के विकार व समाधान (Eye Diseases And Treatment In Hindi)


बढ़ते स्मार्टफोन के उपयोग और लगातार घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से आंखों से संबंधित
समस्याएं उत्पन्न हो रही है। पलक झपकाए बिना लगातार स्मार्ट फोन का उपयोग करने वाले युवाओं में
रेटिना से संबंधित समस्याएं सामने आ रही हैं। आंखों में होने वाले विकारों में आंखों में जलन, आंखों की
दृष्टि कम होना (निकट दृष्टि दोष), धुंधलापन, रतौंधी, मोतियाबिंद आदि विकार होते हैं जिनका समय पर
इलाज नहीं कराया गया तो समस्या गंभीर भी हो सकती है। इस लेख के माध्यम से हम आंखों में होने वाले
विकारों और समाधान (Eye Diseases And Treatment In Hindi) पर चर्चा करेंगे।

Eye Diseases And Treatment In Hindi


1- ग्लूकोमा(Glaucoma)-: 

(आंखों की रोशनी कम होना) ग्लूकोमा आंखों में होने वाला विकार है, जिसे काला मोतिया भी कहा जाता है। यह रोग आनुवंशिक होता है तथा 40 वर्ष के बाद इस रोग के होने का खतरा अधिक
होता है। इस रोग में आंखों की ऊपरी सतह और देखने की क्षमता प्रभावित होने लगती है तथा आंखो
द्वारा मस्तिष्क को संकेत भेजने वाली ऑप्टिक तंत्रिकायें बुरी तरह प्रभावित हो जाती हैंं और उनकी कार्य
करने की छमता धीमी हो जाती है, इससे दूसरी आंख पर अधिक दबाव पड़ता है। शुरुआती अवस्था में ही
इसकी पहचान करा कर इलाज कराना आवश्यक होता है वरना ग्लूकोमा की वजह से अंधापन भी हो
सकता है।

Eye Diseases And Treatment In Hindi

समाधान (Solution)-: 

ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए समय समय पर आंखों की जांच कराएं। नेत्र रोग विशेषज्ञ
से ही नियमित जांच करानी चाहिए, जिसमें विजन टेक्स्ट भी कराना आवश्यक है। अगर इस रोग के होने
की शंका आपके मन में है तो मोनियोस्कोपी, कंप्यूटराइज्ड फिल्ड टेस्ट, नर्व फाइबर आदि टेस्ट डॉक्टर की
सलाह से करवा लेने चाहिए।

2- जाला या धुंधलापन(Night blindness )-: 

आंखों में होने वाले विकारों में धुंधलापन या जाला बनना भी एक गंभीर समस्या है। इस रोग में रोगी की आंखों के सामने एक जाला जैसा महसूस होता है, ऐसा लगता है मानो आंखों के सामने धुंधलापन या धूलकण उड़ रहे होंं। आंखों में जाला पड़ने का कारण शारीरिक कमजोरी होता है
जो पुराने बुखार, अधिक सेक्स क्रिया या खून की कमी आने के कारण होता है।

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समाधान (Solution)-:

अरंडी का तेल धुंधलापन में काफी लाभदायक होता है। 30 मिलीलीटर अरंडी के तेल में 25
बूंद कार्बोलिक एसिड की मिलाकर सुबह-शाम दो दो बूंद आंखों में डालनी चाहिए, काफी हद तक
धुंधलापन की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

3- निकट दृष्टि दोष-: (मायोपिया/ Nearsighted) 

आंखों में होने वाले विकार में निकट दृष्टि दोष भी प्रमुख है। इससे प्रभावित व्यक्ति को पास की वस्तुयें तो साफ दिखाई देती हैं परंतु दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं,
इसके कारण दूर की वस्तुएं देखने में अधिक परेशानी होती है। यह रोग लंबे समय तक स्मार्टफोन या
कंप्यूटर पर कार्य करने की वजह से होता है। इस रोग में आंखें जल्दी थक जाती है तथा आंखों में जलन व
रूखेपन की समस्या होने लगती है।

eye diseases


समाधान (Solution)-:

निकट दृष्टि दोष में व्यायाम अधिक लाभ दायक है। व्यायाम में मुख्य रूप से करतल विश्राम
और पुतली घुमाना, प्राणायाम व सर्वांगासन अत्यधिक लाभदायक हैंं। साथ ही विटामिन और प्रोटीन
युक्त भोजन का सेवन करें। अधिक समय तक पलक झपकाए बिना कंप्यूटर पर कार्य न करें।

4- मोतियाबिंद(Cataracts)-: 

आंखों में होने वाले विकार में मोतियाबिंद एक आम समस्या है। यह आंखों में किसी भी तरह की चोट लगने के कारण और धमिनी रोग होने के कारण होता है। मोतियाबिंद मधुमेह से ग्रसित व्यक्तियों या गठिया से पीड़ित व्यक्तियों में अधिक होता है। मोतियाबिंद दो प्रकार का होता है कोमल और कठोर। कोमल मोतियाबिंद 35 साल से कम उम्र तक होता है जबकि कड़ा मोतियाबिंद वृद्धावस्था में होता है। कोमल मोतियाबिंद नीला और कड़ा मोतियाबिंद पीला होता है। इस रोग में आंखों के देखने की शक्ति धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है। एक समय के बाद रोगी को दिखना पूरी तरह से बंद हो जाता है।

Eye Diseases And Treatment In Hindi

समाधान (Solution)-:

मेंदा, चीनी, धुले हुए चावल, चाय,कॉफी, शराब, चिकनाई युक्त भोजन, अचार, उबले हुए आलू
का सेवन रोगी को नहीं करना चाहिए। आंखों में असली शहद का प्रयोग भी फायदेमंद होता है। सप्ताह में
एक दो बार असली शहद लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

5- रतौंधी(Night blindness)-:


रतौंधी भी आंखों में होने वाला विकार है ।पौष्टिक आहार की कमी के कारण यह रोग होता है। समुद्र भी किनारे बसे राज्यों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है। यह रोग शरीर में विटामिन ए की कमी हो जाने के कारण होता है। इस रोग में व्यक्ति को दिन के समय तो सभी वस्तुएं साफ दिखाई देती है
परंतु जैसे ही अंधेरा होने लगता है रोगी को दूर की वस्तुओं के साथ साथ पास की वस्तुएं देखने में भी
परेशानी होती है। रतौंधी में कार्निया सूख जाता है तथा आईबॉल धुंधला वह मटमैला हो जाता है। आंखों
से सफेद रंग का स्राव होने लगता है। रतौंधी में आंखों के बाॅॅल कड़े हो जाते हैं, व पलकों पर छोटे छोटे
दाने व सूजन दिखाई देने लगती है। समय पर ध्यान ना दिया जाए तो रोगी अंधा भी हो सकता है।
Eye Diseases And Treatment In Hindi

समाधान (Solution)-:

रतौंधी रोग में चौलाई का साग अत्यधिक फायदेमंद होता है, जिसे भैंस के घी में सूर्यास्त के
बाद खाना चाहिए। इस सांग को खाने के बाद अन्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए इसके अलावा
गौमूत्र में छोटी पीपल घिसकर सेवन करने से रतौंधी रोग में आराम मिलता है।

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