-->

24.2.18

Skin Fungal Infection Treatment in Hindi

एक्जिमा एक प्रकार की त्वचा से सम्बन्धित बीमारी है या हम ये कह सकते हैं कि ये चर्म रोग होता है. इस रोग के होने से शरीर में गोल आकर के लाल दाने हो जाते हैं, जिनमें सुखी और तर प्रकार की खुजली होती है. अगर इसमें थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाये तो, ये बीमारी शरीर में अपनी जड़े जमा लेती हैं, इसके बाद ये बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती, चाहे आप जितनी भी दावा खा लें ये वापस लौट आती है. इस बीमारी के कई गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों के पास रक्त का स्राव भी होता। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है.

Also Read: 30+ Dadi Maa Ke Gharelu Nuskhe Desi Ayurvedic Upchar


Skin Fungal Infection Treatment in Hindi

एक्जिमा के कारण(Skin Fungal Infection)

सबसे पहला कारण शरीर में खून की खराबी. अगर शरीर में खून ख़राब है तो कई सारे रोग होने की सम्भावना होती है, ऐसे में ज्यादा त्वचा सम्भाधित लोग होते हैं. दूसरा कारण पेट की खराबी के भी है. हाजमे की खराबी की वजह से कब्ज (गैस) बन जाने के कारण भी एक्जिमा हो जाता है। औरतों में मासिकधर्म से सम्बंधित रोगों के कारण भी ये रोग हो जाता है। एक्जिमा से संक्रमित व्यक्ति के जख्म को छूने से या उस व्यक्ति के कपड़े पहनने से भी ये रोग फैलता है. एक्जिमा की समस्यां आमतौर पर केमिकल युक्त चीजों जैसे साबुन, चूना, सोडा, डिटर्जेंट के अधिक इस्तेमाल करने से भी होती है.

एक्जिमा के लक्ष्ण

एक्जिमा रोग की शुरुआत में रोगी को शरीर में तेज खुजली होती है। एक जगह  बार-बार खुजली करने पर उसके शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं। बाद में इन फुंसियों में बहुत तेज जलन और खुजली होती है। जब फुंसी पक जाती है तो उसमें से मवाद बनने लगता है। इसके बाद फुंसियों के जख्म बन जाते है। इसके आलावा शरीर में लाल दाने,  जलन रूप में फैलाव और बाद में बुखार आना एक्जिमा के कुछ लक्षण हैं.

एक्जिमा के प्रकार(Fungal Infection Type)

संक्रमण रोग एक्जिमा को कई प्रकार में विभाजित किया जा सकता है.
  1. एटोपिक डर्मेटाइटिस (Atopic dermatitis): - यह एक्जिमा आम तौर पर बचपन में शुरू होता है. इस प्रकार का  एक्जिमा अक्सर बाद में हल्का हो जाता है जल्दी ठीक हो जाता है।
  2. डिज़िद्रोटिक एक्जिमा (Dyshidrotic eczema): -  इस प्रकार का एक्जिमा हाथों और पैरों पर छोटे फफोले बनाने का कारण होता है। डिज़िद्रोटिक एक्जिमा महिलाओं को ज्यादा होता है।
  3. हाथ पर एक्जिमा (Hand eczema): - इसके नाम से ही पता चल रहा है कि ये केवल हाथों को प्रभावित करता है. इसी लिए इसे हाथ का एक्जिमा कहा जाता है। यह एक्जिमा उन लोगों में होता है जो हेयरड्रेसिंग या सफाई के दौरान नियमित रूप से रसायनों का उपयोग करते हैं.    न्यूरोडर्मेटाइटिस (Neurodermatitis): - ये वाला एक्जिमा मोटी, स्केल पैच बना देता है,  जो त्वचा पर उभर जाता है।
  4. न्यूमूलर एक्जिमा (Nummular eczema): -  जिस को भी ये वाला एक्जिमा होता है, उसके शरीर में सिक्के के आकार का स्पॉट बन जाता है। इसमें बहुत खुजली होती है।
  5. स्टैटिस डर्मेटाइटिस (Stasis dermatitis):-  जब त्वचा में कमजोर नसों से तरल पदार्थ बहता है, तब ये एक्जिमा होता है। इसमें खुजली और दर्द ज्यादा होता है।
  6. कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Contact dermatitis): - जब त्वचा में फुंसी या लाल धब्बे को आप छुते है और वह विकराल रूप ले लेते हैं , तो ये वाला एक्जिमा हो सकता है। इसके दो प्रकार है -
  • एलर्जी कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Allergic contact dermatitis) धातु जैसी उत्तेजक के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया के कारण होता है।  
  • उत्तेजक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Irritant contact dermatitis) - जब एक रासायनिक या अन्य पदार्थ त्वचा को परेशान करते हैं।

योग और व्यायाम में सावधानी

नियमित रूप से रोग और व्यायाम करने से बहुत लाभ होते हैं. योग और व्यायाम उन लोगों के लिए लाभकारी होते हैं जिनके लिए तनाव रोग को बढ़ाने में कारक हो। जबकि अन्य लोगों में व्यायाम से केवल एक ही समस्या होती है, कि उत्पन्न पसीने से खुजली बढ़ जाती है। जब योग और व्यायाम करने के बाद लोग नहाते नहीं है तो उसके शरीर में पसीना जमा हो जाता है, जिससे बाद में खुजली उत्पन्न होने लगती है, जिसको खुजलाने के बाद वहां एक्जिमा के होने का खतरा होता है. इसलिए हमें नियमित रूप से नहाना चाहिए.

एक्जिमा के दौरान लेने और परहेज करने योग्य आहार(Skin Fungal Infection Diet)

एक्जिमा के दौरान कच्चे फल जैसे कि सेब, नाशपाती, केले आदि का सेवन करना चाहिए। इसके आलावा ताज़ी सब्जियाँ खानी चाहिए. छोटे बच्चों के लिये स्तन दुग्ध ही सही है।
करेले और नीम के फूलों का सेवन भी लाभकारी होता है।


एक्जिमा के दौरान एसिड उत्पन्न करने वाले आहार जैसे कि माँस, चिकन, सूअर का माँस से परहेज करना चाहिए। इस दौरान डेरी उत्पाद के सेवन से बचना चाहिए। इसके आलावा मक्के की चिप्स, पेस्ट्री, सफ़ेद चावल और मैदे का पास्ता (शक्कर की उच्च मात्रा), खमीर युक्त ब्रेड और कृत्रिम मीठे तत्व नहीं खाना चाहिए।  दही और अचार जैसे खट्टी चीज़ों का सेवन बिलकुल न करें।


एक्जिमा  के उपचार(Skin Fungal Infection Treatment)


  • शुद्ध हल्दी भी एक्जिमा की चिकित्सा में लाभ प्रदान करती है। इसे एक्जिमा के चकतों पर लगाया जा सकता है और दूध में मिलाकर भी पीया जा सकता है। इसके आलावा नींबू के रस में सुखा सिंघाड़ा घिसे और उसे दाद वाली जगह पर लगाए. इससे भी आराम मिलेगा. आप दाद वाली जगह पर हल्दी का लेप भी लगा सकते हैं. आप गेंदे की पत्तियों को उबालकर उसका पेस्ट दाद वाली जगह पर भी लगा सकते हैं. आप कभी भी सादे पानी से दाद को न धोए, बल्कि अजवाईन पीस कर गर्म पानी में मिलाए और फिर इससे दाद को धोए.
  • आप एक चम्मच कपूर के साथ एक चम्मच चन्दन को मिला ले. फिर इसे एक्जिमा से ग्रसित जगह पर लगायें. इससे भी बहुत फायदा होता है।
  • अगर आपके घर में तुलसी लगी है तो ये बहुत अच्छा है, आप तुलसी के पत्तों के रस में थोडा सा घी लेकर उसे अच्छी तरह से मिला लें, फिर इस लेप को दाद वाली जगह में लगायें. इससे एक्जिमा से छुटकारा मिलता है।
  • पालक की जड़ को नींबू के रस में पीसकर लगाने से एक्जिमा रोग ठीक हो जाता है।
  • ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के पत्तों को कालीमिर्च के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा रोग समाप्त हो जाता है।

त्वचा का ख्याल रखें(Skin Fungal Infection Treatment in Hindi)

बताया जाता है कि जिनकी त्वचा सूखी और संवेदनशील होती हैं उस लोगों को एक्जिमा जल्दी होता है.  इसलिए जरुरी है कि आप अपनी त्वचा का ध्यान रखें। इसके लिए आप ठंडे पानी से नहाने की जगह गर्म पानी से स्नान करें वो ही रोजाना नहायें। अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज़ करना न छोड़ें। यदि त्वचा बहुत शुष्क है,  तो आप कोई तेल या क्रीम से मालिश कर सकते हैं.

Popular Posts